बाल यौन शोषण के विरुद्ध विधिक संरक्षण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन: झाँसी जिले में संस्थागत प्रतिक्रिया और न्याय में विलंब का अध्ययन।

Authors

  • स्वदेश यादव Author
  • प्रो० (डॉ०) अमर नाथ Author

DOI:

https://doi.org/10.5281/zenodo.18104050

Keywords:

बाल यौन शोषण, पॉक्सो अधिनियम, झाँसी जिला, सामाजिक-विधिक अध्ययन, कार्यान्वयन, कलंक, संरक्षण।

Abstract

यह शोध पत्र बाल यौन शोषण (CSA) से बच्चों के संरक्षण के लिए स्थापित सामाजिक और विधिक ढाँचे का एक आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसका विशेष संदर्भ झाँसी जिले, उत्तर प्रदेश से है। भारत में बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए 'लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012' (पॉक्सो अधिनियम, 2012) एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है , हालाँकि, यह अध्ययन इस बात की जाँच करता है कि कानूनी प्रावधानों के बावजूद, झाँसी जैसे विशिष्ट क्षेत्रीय संदर्भों में बच्चों को पूर्ण संरक्षण प्रदान करने में विफलता क्यों दिखाई देती है। प्राथमिक ध्यान कानूनी कार्यान्वयन में मौजूद अंतरालों , सामाजिक कलंक , और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता एवं समर्थन प्रणालियों की कमी पर केंद्रित है। शोध का उद्देश्य एक व्यापक सामाजिक-विधिक रणनीति की सिफारिश करना है जो कानून को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर सके, जिससे झाँसी जिले में बाल यौन शोषण के मामलों में प्रभावी रोकथाम और पीड़ित-केंद्रित न्याय सुनिश्चित हो सके।

DOI: 10.5281/zenodo.18104050

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Author Biographies

  • स्वदेश यादव

    शोधार्थी,

    विधि संकाय, आगरा कॉलेज, आगरा

  • प्रो० (डॉ०) अमर नाथ

    प्रोफेसर

    विधि संकाय, आगरा कॉलेज, आगरा

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Published

12/30/2025

How to Cite

बाल यौन शोषण के विरुद्ध विधिक संरक्षण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन: झाँसी जिले में संस्थागत प्रतिक्रिया और न्याय में विलंब का अध्ययन।. (2025). Journal of Review in International Academic Research, 1(6), 92-97. https://doi.org/10.5281/zenodo.18104050