भारत में अंतर-जातीय विवाह और कानूनी चुनौतियाँ: एक विस्तृत विश्लेषण
DOI:
https://doi.org/10.5281/779n5t32Abstract
भारत में अंतर-जातीय विवाह केवल एक व्यक्तिगत चुनाव नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक और कानूनी संघर्ष है जो सदियों पुरानी जातीय श्रेणीबद्धता को चुनौती देता है। भारतीय सामाजिक संरचना में जाति व्यवस्था ने वैवाहिक संबंधों को हमेशा से नियंत्रित किया है, जहाँ 'एंडोगेमी' (अपनी ही जाति में विवाह) को पवित्र और 'एक्सोगेमी' (जाति से बाहर विवाह) को अक्सर सामाजिक मर्यादा का उल्लंघन माना जाता रहा है। हालाँकि, भारत का संविधान प्रत्येक वयस्क नागरिक को अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न ऐतिहासिक फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता' के अधिकार में अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार एक अभिन्न अंग है।
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Copyright (c) 2026 डॉ. आशुतोष द्विवेदी (Author)

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